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One Nation One Port(ONOP) क्या हैै: जानिए संपूर्ण जानकारी

सभी प्रतियोगी परीक्षाओं जैसे UPSC, SSC, Railway, Bank, UPSSSC में सरकारी योजनाओं से काफी प्रश्न पूछे जाते हैं इन्हीं योजनाओं में एक योजना One Nation One Port (ONOP) है।



भारत एक ऐसा देश है जिसकी समुद्री विरासत हजारों वर्षों पुरानी है। प्राचीन काल से लेकर आधुनिक समय तक, भारत का समुद्री व्यापार देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार रहा है। आज भी भारत के समुद्री तट पर 13 बड़े और 200 से अधिक छोटे बंदरगाह संचालित हैं, जो करोड़ों टन माल आयात-निर्यात में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लेकिन इतने बड़े नेटवर्क के बावजूद, भारतीय बंदरगाह कई बार एक समान नीति, प्रणाली और प्रक्रियाओं के अभाव में अपने सर्वोच्च क्षमता स्तर तक नहीं पहुँच पाते।
इन्हीं समस्याओं को दूर करने और पूरे बंदरगाह तंत्र को एकीकृत करने के लिए सरकार ने “एक राष्ट्र-एक बंदरगाह” (One Nation One Port Process) की शुरुआत की।

इस पहल की औपचारिक शुरुआत 27 फरवरी 2025 को हुई। 

उस दिन, सर्बानंद सोनोवाल — जो उस समय केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग (MoPSW) मंत्री थे — ने देश के बंदरगाहों की प्रक्रियाओं, नीतियों एवं परिचालन को एकीकृत करने के उद्देश्य से “One Nation: One Port Process (ONOP)” को अनावरण किया। 

इस अवसर पर केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन व जलमार्ग मंत्रालय ने घोषणा की कि अब देश के सभी बंदरगाहों में संचालन, डॉक्यूमेंटेशन, शुल्क और प्रक्रियाएँ एक समान मॉडल पर होंगी। यह भारत के बंदरगाह क्षेत्र में पहली बार ऐसा व्यापक सुधार है जिसमें पूरे देश को एकीकृत प्रक्रिया से जोड़ने का प्रयास किया गया है।

 सरल शब्दों में, One Nation One Port  एक एकीकृत पोर्ट मैनेजमेंट मॉडल है जिसमें—

  • सभी भारतीय बंदरगाह एक समान नियमों का पालन करेंगे।
  • डॉक्यूमेंटेशन और कस्टम प्रक्रिया एक जैसे होंगे।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पोर्ट-सेवाएँ एक ही प्रणाली से संचालित होंगी।
  • लॉजिस्टिक, शिपिंग और माल ढुलाई से जुड़ी प्रक्रियाएँ मानकीकृत होंगी।

इसका लक्ष्य है—
"सुविधा, गति, पारदर्शिता और व्यापारिक दक्षता बढ़ाना"।

 

One Nation One Port की आवश्यकता क्यों पड़ी?

भारत के बंदरगाह अलग-अलग राज्यों में होने के कारण अब तक उनके संचालन, शुल्क और प्रक्रियाएँ अलग-अलग थीं। इससे कई समस्याएँ उत्पन्न होती थीं:

  1. डॉक्यूमेंटेशन की जटिलता
    अलग-अलग पोर्ट पर कागज़ी प्रक्रिया और अनुमति नियम अलग थे।
  2. लॉजिस्टिक लागत बढ़ना
    असंगत संचालन मॉडल से व्यापारियों पर अतिरिक्त खर्च आता था।
  3. कस्टम क्लियरेंस में देरी
    मानकीकरण के अभाव में माल क्लियरेंस में समय ज्यादा लगता था।
  4. अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में कमी
    अन्य बड़े देश केंद्रीकृत पोर्ट सिस्टम अपनाकर तेज़ी से आगे निकल गए थे।

इन वजहों से भारत को एक ऐसे मॉडल की आवश्यकता थी जिसमें पूरे देश के बंदरगाह एक संयुक्त नेटवर्क की तरह काम करें। यही “एक राष्ट्र-एक बंदरगाह" का आधार बना।


One Nation One Port  के प्रमुख उद्देश्य :

1. एकीकृत डिजिटल पोर्ट सिस्टम

अब सभी बंदरगाह एकल डिजिटल प्लेटफॉर्म से संचालित होंगे।
जहाँ—

  • कंटेनर ट्रैकिंग
  • बिलिंग
  • जहाज बुकिंग
  • कस्टम क्लीयरेंस
  • डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन

एक ही जगह से संभव होगा।

2. संचालन में पारदर्शिता

जब नियम और प्रक्रियाएँ हर बंदरगाह में समान होंगी, तो किसी भी प्रकार की मनमानी या अनियमितता की संभावना कम होगी।

3. व्यापार की गति बढ़ाना

बंदरगाह प्रक्रियाएँ तेज़ होने से भारत का अंतरराष्ट्रीय व्यापार तेजी से बढ़ेगा।
निर्यातकों और आयातकों को समय की बचत होगी।

4. लॉजिस्टिक लागत में कमी

एकीकृत मॉडल से माल ढुलाई का खर्च काफी कम होने की उम्मीद है।
लंबी प्रक्रिया, अलग शुल्क और डॉक्यूमेंटेशन की दिक्कतों से छुटकारा मिलेगा।

5. निवेश आकर्षित करना

जब बंदरगाह अधिक आधुनिक व कुशल होंगे, तो घरेलू व विदेशी निवेशक बंदरगाह से जुड़े उद्योगों में अधिक निवेश कर सकेंगे।


One Nation One Port  के संभावित लाभ :

1. निर्यातकों के लिए बड़ा फायदा

सरल प्रक्रियाओं से भारत का निर्यात तेज़ी से बढ़ेगा,
जिससे “मेक इन इंडिया” और “वोकल फॉर लोकल” को बढ़ावा मिलेगा।

2. छोटे बंदरगाहों को नए अवसर

अब केवल बड़े बंदरगाह ही सुविधाओं में आगे नहीं रहेंगे;
छोटे बंदरगाहों को भी समान नियम, तकनीक और समर्थन मिलेगा।

3. मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी मजबूत होगी

रेल, सड़क, जलमार्ग और बंदरगाह एक संयुक्त इकाई की तरह काम करेंगे।
इससे पूरी सप्लाई चेन ज्यादा मजबूत बनेगी।

4. रोजगार बढ़ेगा

लॉजिस्टिक, वेयरहाउसिंग, शिपिंग और पोर्ट-सेवाओं में लाखों नए रोजगार की संभावना है।

5. भारत की ग्लोबल रैंकिंग में सुधार

पोर्ट दक्षता बढ़ने से भारत वैश्विक लॉजिस्टिक इंडेक्स में भी ऊपर जाएगा।

One Nation One Port की चुनौतियाँ : 

हर नीति की तरह इस पहल को भी कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा:

  • राज्यों और केंद्र सरकार के बीच समन्वय की आवश्यकता
  • पुराने सिस्टम को हटाकर नया डिजिटल सिस्टम लागू करना
  • तकनीकी प्रशिक्षण की जरूरत
  • निजी और सरकारी दोनों बंदरगाहों को एक समान ढाँचे में लाना
  • कानूनी ढांचे में बदलाव

लेकिन सरकार ने इन चुनौतियों को हल करने के लिए चरणबद्ध मॉडल अपनाया है।

निष्कर्ष:

“एक राष्ट्र-एक बंदरगाह” (One Nation One Port Process) सिर्फ एक नीति नहीं, बल्कि भारत के समुद्री व्यापार को नई दिशा देने वाला बड़ा सुधार है। 27 फरवरी 2025 को शुरू हुई यह पहल भारत को एकीकृत, आधुनिक, पारदर्शी और विश्वस्तरीय बंदरगाह नेटवर्क प्रदान करेगी।

लंबे समय में यह न केवल व्यापार बढ़ाएगी, बल्कि भारत को वैश्विक समुद्री शक्ति बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
अगर यह पहल सफल रहती है, तो यह भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में मील का पत्थर साबित होगी।


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